बीसीसीआई के रवैये पर जुबान खोलने लगे हैं खिलाडी ….

बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) देश में क्रिकेट को संचालित करता हैै। विश्व का सबसे धनी बोर्ड होने की वजह से विश्व क्रिकेट जगत में उसकी तूती बोलती है। अपने खिलाडियों का जहॉ बोर्ड बहुत खयाल रखता हैं, तो वहीं खिलाडी उसकी अनुमति के बगैर कोई स्टेटमेन्ट तक नहीं दे सकते हैं। यानि की सबकुछ बोर्ड के कहे अनुसार ही उसे करना होता है। लेकिन इन दिनों बोर्ड के रवैये पर खिलाडी मुखर होकर अपने दिल की बात कहने लगे हैं। ताजातरीन उदाहरण है मध्यप्रदेश के रहने वाले और वर्तमान में केरल की ओर से घरेलू क्रिकेट में खेलने वाले ऑलराउंडर जलज सक्सैना का। जिन्होंने बीसीसीआई से प्रश्न कर लिया है कि जब वे घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल खिलाडी है और बोर्ड उन्हें घरेलू क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर बोर्ड सम्मानित भी करता है, तो उन्हें इंडिया ’ए’ में भी चयनित क्यों नही करता ?


चार वर्षों से जलज सर्वश्रेष्ठ है
घरेलू क्रिकेट में विगत चार वर्षों से जलज सक्सैना का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। उन्हें वर्ष 2017-18 के लिए सर्वश्रेष्ठ गेदबाज के माधवराव सिंधिया अवार्ड तथा सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर के लाला अमरनाथ अवार्ड के लिए चुना गया है। इस सत्र में उन्होंने 7 मैचों में 44 विकेट चटकाए। जिसकी वजह से वे रणजी क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। पिछले सत्र में 7 मैचों में उन्होंने 43.68 के औसत से 522 रन बनाए। जिसमें एक शतक व तीन अर्धशतक शामिल थे। एक सत्र में 522 रन और 44 विकेट के प्रभावशाली प्रदर्शन के आधार पर वे सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बने। पिछले चार वर्षों में तीन बार जलज देश के सवश्रेष्ठ आलराउंडर का अवार्ड प्राप्त कर रहे हैं। जो किसी भी खिलाडी के लिए बहुत ही बडी बात होती है। इस प्रदर्शन के आधार पर वे भारतीय क्रिकेट टीम में आने के सपने देख रहे हैं।

दिल का दर्द फूटा
जलज सक्सैना को जब वर्ष 2017-18 के लिए घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने पर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया, तब उनके दिल में दबी कसक बाहर आ गई। उनका केवल यह कहना था कि यदि वे विगत 4 वर्षों से घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वे इंडिया ’ए’ टीम में क्यों नहीं चुने जा रहे है ? जिसकी वजह से वे बहुत ही अधिक आहत हैं। अब उन्हें अवार्ड लेना भी साल रहा है। निरंतर प्रभावशाली प्रदर्शन करने के बाद भी उनके लिए आगे बढने के रास्ते बंद क्यों हो रहे हैं ? उनकी बात बहुत हद तक सही भी है। बीसीसीआई का घरेलू क्रिकेटीय ढांचा बहुत मजबूत है। खिलाडियों को प्रदर्शन करने का भरपूर मौका मिलता है। घरेलू टूर्नामेंटों के माध्यम से वह राष्ट्रीय टीम में की ओर कदम बढाता है। ऐसे में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाडियों का प्रदर्शन अब किसी से छुपा नहीं रह सकता। खिलाडी को स्वयं पता रहता है कि उसने प्रत्येक मैच व टूर्नामेंट में उसने किस स्तर का प्रदर्शन किया है। ऐसे में जलज के दिल की टीस सही है। एक साल की बात होती तो शायद वे उसे पचा लेते। बात लगातार चार सालों की है। यही वजह है कि जलज के भीतर हर साल की टीस जमा होती गई और अततः चौथे साल बाहर आ ही गई।


मप्र के ईश्वर पांडे अच्छे प्रदर्शन की दम पर भारतीय टेस्ट टीम में आ गए थे
वर्ष 2012-13 के घरेलू सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले मध्यप्रदेश के तेज गेंदबाज के ईश्वर पाण्डे अपने प्रभावी प्रदर्शन के सहारे, उसी सत्र में पहले इंडिया ’ए’ टीम में आए। उसके बाद न्यूजीलैण्ड दौरे पर एक दिवसीय व टेस्ट टीम में शामिल किये गये थे। ईश्वर का प्रदर्शन और भारतीय टीम में पहुॅचना एक उदाहरण है कि बोर्ड हर खिलाडी के प्रदर्शन का सटीक आंकलन करता है। हालांकि ईश्वर को अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का मौका नहीं मिला परन्तु वे भारतीय टीम में पहुॅचनें में कामयाब अवश्य हुए थे। जलज भी उसी तरह से अपने आप को देख रहे होंगे, किन्तु शायद ईश्वर पाण्डे की तरह उनकी किस्मत अच्छी नहीं है।


अब चनयकर्ताओं को जवाब देना होगा
31 वर्ष के हो चले जलज सक्सैना आज भी जिस प्रकार से राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं, वह तो काबिले तारीफ है। युवा खिलाडी जिस तरह प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे देखते हुए उनसे कॉम्पीटीशन करना दिनोंदिन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। भारतीय टीम में शामिल होने के लिए वे जो सपना देख रहे थे, वह सपना धीमे-धीमे टूटता सा जा रहा है। क्योंकि जब वे इंडिया ’ए’ टीम में ही चयनित नहीं हो पा रहे हैं, तो भारतीय टीम के दरवाजे उनके लिए कैसे खुल सकेंगे। बढ़ती उम्र उनके चयन में आडे आती जा रही है। पिछले चार वर्षों से उनकी अनदेखी ने जलज को और पीछे धकेल दिया है।
जलज के बीसीसीआई से सवाल करने पर उसके क्या परिणाम होते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन पिछले चार वर्षों से जो चयनकर्ता जलज के प्रदर्शन की अनदेखी कर रहे थे, वे सवालों के निशाने पर आ गए हैं। उन्हें जवाब देना होगा कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियॉ निर्मित हुई, की घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले खिलाडी को उन्होंने आगे नहीं चुना। बात सार्वजनिक होनी ही चाहिये। बीसीसीआई भी कहता है कि वे अपने हर काम में पारदर्शिता रखता है। ऐसे में जलज सक्सैना के साथ चयनकर्ताओं का जो व्यवहार रहा, वह भी पारदर्शी रूप से सामने आये। चयनकर्ताओं के जवाब से जलज की चोट पर मरहम भी लग सकेगा। जिससे वे न केवल जलज को संतुष्ट कर सकेंगें वरन् ऐसे दूसरे कुछ और खिलाडी जिनके सामने ऐसे परिस्थितियॉं आती होंगी, उनकी भी टीस चयनकर्ताओं के फैसले से थोडा कम होगी। लेकिन जलज के महत्वपूर्ण चार साल वापस नहीं लौटेगें।


दामोदर प्रसाद आर्य
(लेखक कमेन्ट्रेटर व खेल समीक्षक हैं)