नदियों में सबसे विलक्षण नदी है नर्मदा ; निष्काम भाव से की गई नर्मदा परिक्रमा ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

नर्मदा परिक्रमा से मिला सम्मान जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
नर्मदा परिक्रमा के आध्यात्मिक अनुभव और धार्मिक महत्व पर कायस्थम ने आयोजित की चर्चा
भोपाल 13 जून 2026
कायस्थम मध्यप्रदेश द्वारा आज पुण्य सलिला मां नर्मदा की परिक्रमा से प्राप्त आध्यात्मिक अनुभवों पर आयोजित चर्चा में मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव, सेवानिवृत आईएएस श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भारती श्रीवास्तव ने मां नर्मदा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपने अनुभव सुनाएं । दुष्यंत संग्रहालय में आयोजित कायस्थम की इस चर्चा में पूर्व मंत्री श्री पी.सी.शर्मा, पूर्व आईएएस श्री सुरेश जैन, लोकायुक्त के उप महानिरीक्षक श्री मनोज सिंह सहित अनेक विशिष्टजन और चित्रांश बंधु बड़ी संख्या में पहुंचे । श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव एवं श्रीमती भारती श्रीवास्तव द्वारा मां नर्मदा की परिक्रमा के आध्यात्मिक अनुभव सुनने के बाद अपने संबोधन में श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि नर्मदा नदी भारत के शरीर पर लिपटा हुआ यज्ञोपवित है। उन्होंने कहा कि नर्मदा की परिक्रमा से जो आत्म ज्ञान की प्राप्ति होती है ,उसका लाभ सारे समाज को मिलना चाहिए। श्री मनोज श्रीवास्तव ने नर्मदा नदी को भारत की विलक्षण नदी बताया,जो शिव जी के स्वेद से पैदा हुई है। श्री मनोज श्रीवास्तव ने मां नर्मदा के धार्मिक महत्व के आयोजन के लिए कायस्थम को बधाई दी तथा नर्मदा परिक्रमा कर चुके श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं भारती श्रीवास्तव को अपने अनुभवों पर आधारित एक पुस्तक की रचना का सुझाव भी दिया।

नर्मदा परिक्रमा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुभव पर चर्चा को प्रारंभ करते हुए श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि परिक्रमा के दौरान कठिन और जोखिम भरे मार्ग से धैर्यपूर्वक की गई यात्रा अद्भुत एवं उल्लेखनीय रही है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें बिना किसी भय एवं स्वार्थ के अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए । अपने जीवन को भय मुक्त रखना ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने निष्काम भाव से की गई नर्मदा परिक्रमा को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया तथा कहा कि नर्मदा मैया की यात्रा से जो मोक्ष प्राप्त हुआ वही परम पुरुषार्थ भी है । नर्मदा पथ की यात्रा से जो सम्मान मिलता है, वह वास्तविक जीवन में नहीं मिलता। नर्मदा परिक्रमा हमें अहंकारी जीवन से मुक्त होने की शिक्षा भी देती है, क्योंकि जो अहंकार प्रवचन से दूर नहीं हो सकता वह नर्मदा परिक्रमा से दूर हो सकता है ।यात्रा यह भी सिखाती है कि जो जीवन में जोड़ा है ,वह किसी काम का नहीं है,साथ नहीं जाएगा । श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि जब इंसान का कोई अस्तित्व नहीं होता या कोई उपाधि नहीं होती या सम्मान नहीं मिलता ,वह पवित्र नदियों के दर्शन मात्र से मिल जाता हैं। श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि निःस्वार्थ की गई सेवा आध्यात्म की पहली सीढ़ी है ,यह नर्मदा तट पर देखने को मिलता हैं।
नर्मदा परिक्रमा में समीप के गांवों में बसे लोगों से मिले निस्वार्थ सहयोग को उन्होंने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। मां नर्मदा के प्रति आस्था नर्मदा के किनारे बसे हुए लोगों के मन में जितनी है, उतनी शहर के लोगों के मन में नहीं है। नर्मदा परिक्रमा के महत्व से प्राप्त ज्ञान की चर्चा करते उन्होंने कहा कि नर्मदा हमारे जीवन को परिवर्तित करती है । परिक्रमा के दौरान जो घटनाएं सामने आती है,वे आस्था को और मजबूत करती है। परिक्रमा के दौरान जो जीवन में परिवर्तन होता है उसे स्वयं नर्मदा के तट पर महसूस किया जा सकता है ।नर्मदा परिक्रमा के दौरान जो एक अलग ऊर्जा मिलती है, वह जीवन में किसी क्षेत्र में नहीं मिलती । नर्मदा पथ की जानकारी हर व्यक्ति को होना चाहिए । नर्मदा परिक्रमा के दौरान यदि आपकी पांचों इंद्रियां जागृत रहे तो मैया को महसूस किया जा सकता है, तभी सही मायने में नर्मदा परिक्रमा पूर्ण होगी।
श्रीमती भारती श्रीवास्तव ने नर्मदा परिक्रमा की विस्तृत जानकारी देते हुए मां नर्मदा की उत्पत्ति और उनके प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को विस्तृत रूप से बताया।उन्होंने बताया कि मां नर्मदा की सबसे पहले परिक्रमा मार्कण्डेय ऋषि ने की थी। नर्मदा परिक्रमा यदि तट तट से होकर की जाए तो मां नर्मदा को सही मायने में महसूस किया जा सकता है। मध्य प्रदेश में मां नर्मदा के विविध स्वरूपों को विविध स्वरूप के दर्शन होते हैं । नर्मदा परिक्रमा सीमित अभ्यास से की जा सकती है। नर्मदा परिक्रमा के पहले हमें नर्मदा पद की पूरी जानकारी होना जरूरी है। नर्मदा पथ पर जितने आश्रम है, उससे कोई व्यक्ति भूखा नहीं रह सकता। पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा ने नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रीवास्तव दंपती को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां नर्मदा की परिक्रमा सच्चे अर्थों में ईश्वर की सच्ची उपासना है . इस अवसर पर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं भारती श्रीवास्तव को श्री मनोज श्रीवास्तव एवं कायस्थम के की ओर से अभिनंदन पत्र सौंपा गया। अभिनंदन पत्र का वाचन उपाध्यक्ष श्री आर.पी.श्रीवास्तव ने किया। कायस्थम के अध्यक्ष प्रलय श्रीवास्तव ने आयोजन एवं गतिविधियों की जानकारी दी । महासचिव डॉ. रश्मि सक्सेना, सचिव आलोक श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव अजय भटनागर,कार्यकारिणी सदस्य संजय खरे, अजय कुमार श्रीवास्तव, उमंग खरे, विष्णु कांत सहाय, राकेश रायजादा, रविशंकर खरे आदि ने श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव एवं श्रीमती भारती श्रीवास्तव का स्वागत किया। कायस्थम की ओर से श्रीवास्तव दंपति को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया इस अवसर पर श्री मनोज श्रीवास्तव ने कायस्थम के वार्षिक फोटो एल्बम का विमोचन भी किया । अंत में संयुक्त सचिव श्री अजय भटनागर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव द्वारा की गई नर्मदा परिक्रमा पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ। इस अवसर पर राज्य शासन के पूर्व एवं वर्तमान अधिकारी, कायस्थम के अनेक पदाधिकारी और सदस्य था अन्य विशिष्ट जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



